Posts

Time Travel ( समय यात्रा) ☆Stephen Hawking Time Travel Theory》

Image
☆Stephen Hawking Time Travel Theory》 कैसा होगा अगर आप भविष्य मे चले जाये तो?  सोचकर ही कितना अजीब लगता हैं Right😟 तो चलीए शुरू करते हैं 
Time Travel यानी समय यात्रा, ये सुनने में तो अच्छा लगता है लेकिन इसके पीछे का तर्क दिमाग चकरा देता है ! हम सभी चाहते हैं की समय में पीछे जाकर अपने द्वारा की गई गलतियों को सुधार लें और भविष्य में समय यात्रा करके अपना भविष्य भी जान लें लेकिन क्या ये संभव है? क्या काल यानी समय में यात्रा की जा सकती है? अगर वैज्ञानिक द्रस्टी से देखा जाए तो समय यात्रा संभव है अगर देखा जाए तो हम सभी समय में यात्रा कर रहे हैं हम सभी भूतकाल से निकल कर वर्तमान में होते हुए लगातार भविष्य की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं और इसी को ही समय यात्रा कहते हैं और हमारी समय में यात्रा की दर 1 घंटे प्रति घंटे की दर से है ! यानी की हमें भविष्य में 1 घंटा आगे जाने के लिए 1 घंटे का ही समय अंतराल लगेगा ! लेकिन क्या समय यात्रा की दर को एक घंटे प्रति घंटे की दर से भी ज्यादा तेज किया जा सकता है? यानी क्या हम छोटे से समय अंतराल में ही भविष्य में आगे जा सकते हैं? जवाब है हाँ, हम छोटे से समय अंतराल मे…

यह पदार्थ इतना मंहगा है कि एक ग्राम बेचकर कई देश खरीद सकते हैं

Image
यह पदार्थ इतना मंहगा है कि एक ग्राम बेचकर कई देश खरीद सकते हैं दुनिया में एक ऐसा पदार्थ भी है जो हीरे से भी मंहगा है। इसकी कीमत इतनी है कि कई देश खरीदे जा सकते हैं। जी हां इस पदार्थ का नाम है एंटीमैटर। एक ग्राम एंटीमैटर की कीमत 312500 अरब रुपये होती है। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं इतनी रकम में क्‍याक्‍या खरीदा जा सकता है। ☆कहां रखा है ये》》
नासा के मुताबिक, एंटीमैटर धरती का सबसे महंगा मेटल है। एक मिलीग्राम एंटीमैटर बनाने में 250 लाख डॉलर रुपए तक लग जाते हैं। जहां ये बनता है, वहां पर विश्व की सबसे बेहतरीन सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। इतना ही नहीं नासा जैसे संस्थानों में भी इसे रखने के लिए एक पुख्ता सुरक्षा घेरा है। जहां कुछ खास लोगों के अलावा एंटीमैटर तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है। 
☆☆क्‍या होता है एंटी मैटर》
इस ब्रह्मांड में सबकुछ पदार्थ यानी की मैटर से बना हैं। आप, मैं, पृथ्वी, वायु, तारे, और सभी पदार्थ। ये पदार्थ Electrons और Quarks से बने हैं। कुछ पदार्थ Muons, tauons, और Neutrino जैसे दुर्लभ कणों से बने होते हैं। यह सब कण उनके बुनियादी स्तर पर होते हैं। लेकिन हर पार्टिकल के लिए, उसके …

Science Facts जो आपको किताबों में नही मिलेंगे

Image
Science Facts जो आपको किताबों में नही मिलेंगे।》》
विज्ञान क्या हैं ????

वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है,जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी शाखा के लिये भी करते हैं, जो तथ्य, सिद्धान्त और तरीकों को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करती है। इस प्रकार कह सकते हैं कि किसी भी विषय के क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कह सकते है।

Science Facts in Hindi
विज्ञान से जुड़े तथ्य》 Science facts: पर विश्वास करना थोड़ा कठिन है, पर यह सच के ज़्यादा करीब है कि आज भी दुनिया में कुछेक ऐसी चीज़ें हैं जो विज्ञान और वैज्ञानिकों से परे बनी हुई हैं. इंसानी शरीर की कई पहेलियां विज्ञान अभी भी सुलझाने की कोशिश कर रहा है. साइंस के नाम पर कई वैज्ञानिक अजीबोगरीब तरह के एक्सपेरिमेंट करते रहते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे “Science facts” बताएंगे जो आपको शायद न पता हो.

1. वैज्ञानिक आज तक निश्चित नहीं कर पाए हैं, कि डायनासोर का रंग क्या था। 2. शुक्र ग्रह पर एक दिन पृथ्वी के एक साल से बड़ा होता है। 3…

ऐल्बर्ट आइंस्टाइन का प्रेरणादायी जीवन》& महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के अनमोल विचार

Image
Albert Einstein》 ऐल्बर्ट आइंस्टाइन का प्रेरणादायी जीवन》 सबसे पीछे रहने वाले एक बालक ने अपने गुरु से पूछा ‘श्रीमान मैं अपनी बुद्धी का विकास कैसे कर सकता हूँ?’
अध्यापक ने कहा – अभ्यास ही सफलता का मूलमंत्र है। Einstein ने इसे अपना गुरु मंत्र मान लिया और निश्चय किया कि अभ्यास के बल पर ही मैं एक दिन सबसे आगे बढकर दिखाऊँगा। बाल्यकाल से अध्यापकों द्वारा मंद बुद्धी और अयोग्य कहा जाने वाला ये बालक अपने अभ्यास के बल पर ही विश्व में आज सम्मान के साथ जाना जाता है। इस बालक को दुनिया आइंस्टाइन के नाम से जानती है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि साधारण से साधारण व्यक्ति भी मेहनत, हिम्मत और लगन से सफलता प्राप्त कर सकता है। आइंस्टाइन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी के यूम (Ulm) नगर में हुआ था। बचपन में उन्हे अपनी मंदबुद्धी बहुत अखरती थी। आगे बढने की चाह हमेशा उनपर हावी रहती थी। पढने में मन नहीं लगता था फिर भी किताब हाँथ से नहीं छोङते थे, मन को समझाते और वापस पढने लगते। कुछ ही समय में अभ्यास का सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगा। शिक्षक भी इस विकास से दंग रह गये। गुरु मंत्र के आधार पर ही आइंस्टाइन अपनी वि…